Wednesday, May 21, 2008

चाँद निकले किसी जानिब


चाँद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
रंग बदले किसी सूरत शब-ऐ-तन्हाई का
[ जानिब = किसी दिशा में, कहीं तो निकले; ज़ेबाई = सुन्दरता ]

दौलत-ऐ-लब से फिर ऐ खुसरव-ऐ-शीरीं-दहाँ
आज रिज़ा हो कोई हर्फ़ शनासाई का
[ लब = होंठ; खुसरवी = शाही; शीरीं = मीठा; दहाँ = मुँह ]
[ रिज़ा = स्वीकृत; हर्फ़ = शब्द; शनासाई = मान्यता, जान-पहचान, परिचय ]

दीदा-ओ-दिल को संभालो की सर-ऐ-शाम "फिराक"
साज़-ओ-सामां बहम पहुँचा रुसवाई का
[दीदा-ओ-दिल = नज़र और दिल; बहम = एक साथ ]




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